टेक्नोलॉजी : भारतीय मूल के नासा के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली है। उन्होंने नासा की अंतरिक्ष यात्री जेसिका मीर के साथ लगभग साढ़े छह घंटे तक अंतरिक्ष में स्पेसवॉक कर इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के लिए बेहद महत्वपूर्ण तकनीकी कार्य पूरा किया। इस मिशन के दौरान दोनों अंतरिक्ष यात्रियों ने नए सोलर पैनल को स्थापित करने की तैयारी के लिए सातवें सपोर्टिंग फ्रेम को सफलतापूर्वक लगाया। यह मिशन इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन की बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। नासा के अनुसार, सभी नए iROSA सोलर पैनल लगने के बाद स्टेशन की बिजली आपूर्ति में लगभग 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी होगी, जिससे भविष्य के वैज्ञानिक प्रयोग और मिशन अधिक प्रभावी ढंग से संचालित किए जा सकेंगे।
यह स्पेसवॉक भारतीय समयानुसार शाम 6 बजकर 3 मिनट पर शुरू हुई और रात करीब 12 बजकर 30 मिनट पर समाप्त हुई। कुल 6 घंटे 27 मिनट तक चले इस अभियान को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के रखरखाव और आधुनिकीकरण के लिए किया गया। यह अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के इतिहास की 281वीं और नासा की 96वीं स्पेसवॉक रही। मिशन के दौरान लगाए गए सपोर्टिंग फ्रेम पर इस वर्ष के अंत तक सातवां नया सोलर पैनल लगाया जाएगा, जबकि आठवां और अंतिम पैनल भी जल्द ही स्टेशन तक पहुंचने की उम्मीद है।
अब तक इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर लगाए जाने वाले आठ नए iROSA सोलर पैनलों में से छह सफलतापूर्वक स्थापित किए जा चुके हैं। सातवें और आठवें पैनल के लिए आवश्यक ढांचा तैयार कर लिया गया है। इन आधुनिक सोलर पैनलों की मदद से अंतरिक्ष स्टेशन को अधिक ऊर्जा मिलेगी, जिससे वैज्ञानिक अनुसंधान, उपकरणों के संचालन और भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों को मजबूती मिलेगी। भारतीय मूल के अनिल मेनन की यह उपलब्धि दुनियाभर के भारतीयों के लिए गर्व का विषय बन गई है और अंतरिक्ष विज्ञान में भारतवंशियों की बढ़ती भागीदारी को भी दर्शाती है।
